लखनऊ। प्राइमरी स्कूलों में बिना आधार वाले बच्चों के दाखिले का संकट गहरा गया है। कई स्कूलों ने बिना आधार वाले बच्चों का दाखिले देने मना कर दिया है। अभिभावकों को 15 दिन में आधार बनवाकर देने की शर्त पर बच्चों को स्कूल में सिर्फ बैठने की इजाजत दे रहे हैं लेकिन दाखिला तभी देंगे जब आधार बनाकर देंगे। गैर जिलों व प्रदेशों से आए मजदूरों के बच्चों के पास निवास और जन्म प्रमाण पत्र नहीं होने से आधार बनने में अड़चनें आ रही है। नए सत्र के तीन दिन में स्कूलों में बिना आधार वाले करीब 200 बच्चे दाखिले के लिये पहुंचे हैं लेकिन इनके दाखिले अभी नहीं हुए हैं। बीते वर्ष 15 हजार से अधिक बच्चों के आधार नहीं बने होने से अपार आईडी, यू डायस और डीबीटी के तहत यूनीफार्म का पैसा इन्हें मिला था।
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बिना आधार अपार आईडी और यू डायस में नहीं होगी एंट्री : लखनऊ में 1619 प्राइमरी स्कूल संचालित हो रहे हैं। एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो गया है। विभागीय अधिकारी बच्चों के दाखिले बढ़ाने के लिये शिक्षकों से स्कूल चलो अभियान और प्रभात फेरी निकालने के निर्देश जारी कर रहे हैं। अभिभावक बच्चों के दाखिले दिलाने के लिये स्कूल आ रहे हैं लेकिन इनके पास आधार नहीं होने से शिक्षक इनका नाम लिखने से मना कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि यदि इन बच्चों का दाखिले दे दिया तो अपार आईडी और यू डायस पर एंट्री कैसे करेंगे? इससे असमंजस की स्थिति बन रही है।
वेतन रोक दिए जाने से िशक्षकों में भारी आक्रोश
बिना आधार के छात्र-छात्राओं को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। फरवरी माह में अपार आईडी नहीं बनने पर बीएसए ने शिक्षकों को वेतन रोक दिया था। इससे शिक्षकों में भारी आक्रोश है। यही वजह है कि बिना आधार वाले बच्चों के दाखिले नहीं ले रहे हैं।
पार्षद और प्रधान भी नहीं लिखकर देते पत्र
मजूदरों का कोई स्थायी निवास नहीं होने की वजह से पार्षद और प्रधान भी निवास प्रमाण पत्र के लिये लिखकर नहीं देते हैं। इससे इनके आगे निवास व जन्म प्रमाण पत्र बनवाने में बड़ी अड़चन आ रही है। आधार नहीं बन पा रहा है। इनके बच्चों के दाखिले नहीं हो पा रहे हैं।
प्रत्येक बीआरसी पर छह से 14 वर्ष के बच्चों के आधार बनाने की व्यवस्था है। दाखिला लेने वाले जिन बच्चों के आधार नहीं बने हैं। स्कूलों के प्रधानाध्यापक अभिभावकों की मदद से इन बच्चों के आधार बनवा रहे हैं।
श्याम किशोर तिवारी, एडी बेसिक, लखनऊ मण्डल
पहले आधार बनाना और संशोधन आसान था। अभिभावक से शपथ पत्र बनवाकर प्रधानाध्यापक की संस्तुति पर आधार बन जाता था। अब जन्म प्रमाण पत्र के बिना आधार नहीं बन पा रहे हैं। इसे सरल करना चाहिए। विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष,प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन यूपी