मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को बरेली कॉलेज के मंच से कहा कि किसी भी सभ्य व विकसित समाज के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे जरूरी है। शिक्षा समाज की आधारशिला है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को बरेली कालेज के ग्राउंड से प्रदेश में स्कूल चलो और विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान का शुभारंभ किया। बरेली को 932.59 करोड़ की 132 परियाजनाओं की सौगात भी दी। उन्होंने 2,554 एंबुलेंस 108 को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया।
पूरे संबोधन में मुख्यमंत्री का शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष फोकस रहा। उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज का भी दायित्व है। अनपढ़ बच्चा समाज और राष्ट्र के लिए चुनौती बन जाता है। मुख्यमंत्री ने मंच से विपक्ष पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि 2017 के पहले बेसिक शिक्षा परिषद की हालत खराब थी। स्कूलों में टॉयलेट, पेयजल और फर्नीचर जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं थीं। 60 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जाते थे। हमने ऑपरेशन कायाकल्प के जरिए 96 प्रतिशत स्कूलों में टॉयलेट, पेयजल, फ्लोरिंग, स्मार्ट क्लास और डिजिटल लाइब्रेरी की व्यवस्था की है। एक साल में 1.91 करोड़ बच्चों को डीबीटी के जरिए 1200-1200 रुपये भेजे हैं। बच्चों को दो यूनिफॉर्म, बैग, किताबें, जूते, मोजे और स्वेटर भी दिए जा रहे हैं। बच्चे स्कूल जाने के लिए उत्साहित हैं। इतना ही नहीं हमारी सरकार ने आठ साल में 44 नए सरकारी मेडिकल कालेज बनाए हैं। 1947 से 2017 तक केवल 12 सरकारी मेडिकल कालेज थे। अब प्रदेश में 80 से ज्यादा मेडिकल कालेज हैं। इनमें 36 से ज्यादा निजी क्षेत्र के हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने मंगलवार को नवाबगंज के अधकटा नजराना में 73.25 करोड़ की लागत से बने मंडलीय अटल आवासीय विद्यालय का लोकार्पण भी किया।
भाषा विवाद वाले राज्य पिछड़ रहे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भाषा को लेकर की जा रही राजनीति की आलोचना की और कहा कि जिन राज्यों के नेता इस विवाद को हवा दे रहे हैं, वे राज्य पिछड़ते जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में रोजगार के बड़े अवसर पैदा हो रहे हैं और इस तरह की संकीर्ण राजनीति युवाओं की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकती है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन का जिक्र कर रहे हैं, तो मुख्यमंत्री ने कहा, कि वो कोई भी हों, वे यही कर रहे हैं। यही कारण है कि ये राज्य धीरे-धीरे पिछड़ते जा रहे हैं। उनके पास कोई अन्य मुद्दा नहीं है और वे अपने राजनीतिक हितों को हासिल करने के लिए भावनाओं को भड़का रहे हैं। तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, बंगाली या मराठी जैसी भाषाएं राष्ट्रीय एकता की आधारशिला बन सकती हैं। उत्तर प्रदेश सरकार अपने छात्रों को तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, बंगाली और मराठी जैसी भाषाएं सिखा रही है। क्या इससे उत्तर प्रदेश किसी भी मायने में छोटा हो गया? क्या यह उत्तर प्रदेश को कमतर करके दिखाता है?