‘सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस’ योजना के तहत 10 जिलों में अभ्युदय विद्यालय बनेंगे


प्रयागराज, । प्रदेश के 10 जिलों में 11.54 करोड़ से मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय बनेंगे। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतिम दिन 31 मार्च को प्रयागराज समेत गाजियाबाद, सिद्धार्थनगर, ललितपुर, झांसी, जालौन, अयोध्या, अम्बेडकरनगर, सुल्तानपुर मिर्जापुर के लिए प्रथम किश्त जारी कर दी है।




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बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि इन स्कूलों में आधुनिक अवस्थापना सुविधाओं के साथ कक्षों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। प्रस्तावित भवन का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। विद्यालयों में विभिन्न प्रकार के सुरक्षा उपकरणों एवं अग्निशमन यंत्रों को भी लगाया जाएगा। मिड डे मील के तहत बच्चों को स्वच्छ भोजन ग्रहण करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।


विद्यालय में खास

1. समर्पित रीडिंग कॉर्नर के साथ लाइब्रेरी


2. भाषा प्रयोगशाला समाधान के साथ कंप्यूटर लैब


3. गणित और विज्ञान की मॉड्यूलर कंपोजिट प्रयोगशाला


4. वर्चुअल कक्षा के साथ इंटरैक्टिव डिस्प्ले स्मार्ट बोर्ड से हाईटेक स्मार्ट क्लास


11.54 करोड़ से बनेंगे अभ्युदय विद्यालय

नौ करोड़ से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेगा डायट

प्रयागराज। शिक्षा मंत्रालय की महत्वाकांक्षी ‘सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस’ योजना के तहत प्रथम चरण में चयनित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में बुधवार को अकादमिक भवन एवं कार्मिक आवास का भूमि पूजन हुआ। इसके लिए नौ करोड़ रुपये की मंजूरी मिली है । 25 प्रतिशत की पहली किस्त निर्माण एजेंसी को जारी हो चुकी है।


मुख्य अतिथि एमएलसी सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि यह जिले की सर्वोच्च अकादमिक संस्था है, जो शिक्षकों के निर्माण में निरंतर अग्रसर है। उप शिक्षा निदेशक एवं डायट प्राचार्य राजेंद्र प्रताप ने कहा कि यह डायट के सभी अकादमिक एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों के टीम वर्क का परिणाम है। कार्यक्रम प्रभारी डॉ. प्रसून कुमार सिंह, डॉ. राजेश पांडेय, प्रवक्ता डॉ. अम्बालिका मिश्रा एवं ऋचा राय ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रवक्ता वीरभद्र प्रताप, विवेक त्रिपाठी, अखिलेश सिंह आदि उपस्थित थे।


स्कूल में स्टेज और ओपेन जिम की भी व्यवस्था की जाएगी

सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थल व स्पोर्ट्स ग्राउंड की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। ग्राउंड (खुली जगह) में एक स्थायी स्टेज के साथ झंडा फहराने के लिए एवं बच्चों के परेड मार्च के लिए समुचित स्थान की व्यवस्था के साथ बच्चों के खेलकूद के लिए विभिन्न प्रकार के झूलों और ओपेन जिम की व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक कक्षा-कक्ष में बच्चों के पठन-पाठन के लिए उनकी कक्षा वर्ग एवं उम्र के अनुसार फर्नीचर (डेस्क-बेंच) की व्यवस्था की जाएगी।


● प्रयागराज, अयोध्या और गाजियाबाद समेत 10 जिलों में मंजूरी


● पहले चरण में 6.92 करोड़ का बजट जारी, जल्द होगा काम


विशेषताएं


● समर्पित रीडिंग कॉर्नर के साथ लाइब्रेरी


● भाषा प्रयोगशाला समाधान के साथ कंप्यूटर लैब


● गणित और विज्ञान की मॉड्यूलर कंपोजिट प्रयोगशाला


● वर्चुअल कक्षा के साथ इंटरैक्टिव डिस्प्ले स्मार्ट बोर्ड से हाईटेक स्मार्ट क्लास


प्रयागराज, मुख्य संवाददाता। प्रदेश के 10 जिलों में 11.54 करोड़ से मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालय बनेंगे। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंतिम दिन 31 मार्च को प्रयागराज समेत गाजियाबाद, सिद्धार्थनगर, ललितपुर, झांसी, जालौन, अयोध्या, सुल्तानपुर, अम्बेडकरनगर और मिर्जापुर के लिए प्रथम किश्त के रूप में 60 प्रतिशत (6.92 करोड़) रुपये जारी कर दिए गए। प्रयागराज के सोरांव में कंपोजिट विद्यालय शिवगढ़ प्रथम को अभ्युदय विद्यालय के रूप में उच्चीकृत किया जाएगा। इसके लिए कुल 1.29 करोड़ मंजूर हुए हैं, जिसमें से 77.47 लाख रुपये जारी हो गए हैं।


बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि इन स्कूलों में आधुनिक अवस्थापना सुविधाओं के साथ प्रति कक्षा वर्ग के लिए अलग एवं लगभग 450 छात्र-छात्राओं के लिए समर्पित कक्षा-कक्ष की उपलब्धता के साथ बच्चों के सर्वांगीण बौद्धिक विकास, उच्च गुणवत्ता की शिक्षा एवं बेहतर शैक्षणिक परिवेश के लिए पूर्व से निर्मित समस्त कक्षा-कक्षों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। प्रस्तावित भवन का निर्माण भूकंपरोधी तकनीक को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। विद्यालयों में विभिन्न प्रकार के सुरक्षा उपकरणों एवं अग्निशमन यंत्रों को भी लगाया जाएगा।


इन स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना के तहत बच्चों को सम्मान के साथ स्वस्थ एवं स्वच्छ भोजन ग्रहण करने की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मिड-डे-मील शेड, रसोईघर, किचेन गार्डन, भंडार गृह, मल्टीपल हैंडवाशिंग यूनिट, डिश वॉश यूनिट एवं यूटिलिटी यार्ड की व्यवस्था की जाएगी। गौरतलब है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालयों का निर्माण होना है।